घर छोड़ना दर्दनाक, यह क्या हो रहा है जोशीमठ में?

Joshimath Sinking News: आजकल उत्तराखंड का जोशीमठ (Uttarakhand’s Joshimath town) भारतीयों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. जोशीमठ दो नदियों अलकनंदा और भागीरथी के बीच में बसा हुआ है. जिसमें अब भूस्खलन होना शुरू हो गया है. आपको बता दें कि लगभग 700 से अधिक घरों में मोटे दरारे आ चुकी हैं जिसके कारण उन सभी घरों को खाली करा लिया गया है. अधिकारियों ने 800 से अधिक ऐसे घरों पर लाल रंग का निशान लगा दिया है जिन्हें ध्वस्त करना है. इसके साथ ही इन घरों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थापित किया जा चुका है. हालांकि विस्थापन के बाद परिवार जन लगातार सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. क्या जोशीमठ भी भूस्खलन के कारण बर्बाद हो जाएगा? पूरा भारत इसी चिंता में है.

Joshimath Sinking News

जोशीमठ में ‘प्रलय’?

land sinking in Joshimath: उत्तराखंड सरकार तथा साथ ही केंद्र सरकार जोशीमठ के भूस्खलन को लेकर एक्टिव हो गए हैं. इस बीच सरकार की टीम ने ऐसे घरों की निशानदेही करी है जिनमें पूरी तरह से लगा रहा चुकी हैं और वहां की भूमि तबाह हो सकती है. लगभ700 से अधिक ऐसे परिवारों को लाल रंग से निशान लगा दिया गया है और उन्हें खाली कर दिया गया है. इन घरों में भारी दरारे आ चुकी हैं और लगातार दूसरे मकान में भी गजरारे बढ़ती जा रही है. इस कारण सरकार हर रोज कुछ नए घरों को लाल रंग से चिन्हित कर रही है. इन घरों के परिवारों को सुरक्षित स्थान पर सरकार द्वारा भेज दिया गया है. लेकिन अभी उनके नुकसान पर तथा मुआवजे पर सरकार ने कोई ऐलान नहीं करा है. सरकार केवल इस भूस्खलन से जोशीमठ को बचाने की चिंता में लगी हुई है.

सरकार द्वारा विशेष कमेटी बनाई गई है

 फिलहाल सरकार द्वारा सभी संकटग्रस्त परिवारों को वहां से निकालने की योजना बनाई जा रही है. इस के साथ ही सरकार सभी संकटग्रस्त परिवारों को मुआवजा देने पर विचार करेगी. विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई अचानक आने वाला भूस्खलन नहीं है. काफी समय से यहां की जमीन लगातार घटती जा रही है जिस पर सरकार तथा दूसरी संस्थाओं ने ध्यान नहीं दिया. इसके परिणाम स्वरूप अब यह घटना अत्यधिक बढ़ गई है और सैकड़ों परिवार एक साथ विस्थापित हो रहे हैं.

1976 ही में चेतावनी दे दी गई थी

साल 1976 में उत्तराखंड उत्तर प्रदेश ही का एक हिस्सा था. एमसी मिश्रा की सदस्यता में 18 लोगों की एक टीम ने उत्तराखंड का सर्वे किया. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि जोशीमठ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार जोशीमठ शहर भूस्खलन के कारण इकट्ठा हुए मलबे पर बना हुआ है.  इन टूटे टुकड़ों की वजह से जोशीमठ शहर के लिए काफी कमजोर है. कमेटी ने इस दशा को रोकने के लिए सुझाव दिया था कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं जिससे जमीन के अंदर पकड़ मजबूत हो जाए. इस के साथ ही अत्यधिक कंस्ट्रक्शन काम करने के लिए भी रोक लगाने की मांग की थी. लेकिन इस सुझाव पर किसी ने अमल नहीं करा.  और लगातार भूस्खलन और दरार जैसी शिकायतें जोशीमठ से आ रही हैं.  अब यह दरारें काफी ज्यादा हो गई हैं और यह चिंता का विषय बन गया है.

क्षतिग्रस्त इमारतों को बुलडोजर से गिराया जाएगा

अधिकारियों द्वारा चुनी गई क्षतिग्रस्त इमारतों खासतौर पर होटलों को बुलडोजर से गिराया जाएगा. ऐसा इसलिए करा जा रहा है ताकि भूस्खलन के समय इन इमारतों के गिरने से ज्यादा क्षति ना हो. हालांकि सरकार के इस निर्णय से स्थानीय लोग काफी नाराज हैं और उन्होंने विरोध भी जताया है. प्रशासन तथा स्थानीय लोगों के बीच आपस में लगातार मीटिंग हो रही है. इसमें डेंजर जो के अंतर्गत आने वाले सभी क्षतिग्रस्त इमारतों को गिराने पर चर्चा हो रही है. हालांकि अभी क्षतिग्रस्त इमारतों से परिवारों को निकाला जा रहा है. इसके पश्चात सभी को बुलडोजर से गिराया जाएगा. 

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सरकार द्वारा ₹150000 का मुआवजा दिया जाएगा

स्थानीय प्रशासन द्वारा लोगों से यह घोषणा करी गई है कि सभी प्रभावित परिवारों को 1.5 Lakh Rs का मुआवजा दिया जाएगा. इसके साथ ही विस्थापित परिवारों को पुनः बस आने के लिए भी राहत पैकेज का ऐलान जल्द ही कर देंगे. इस पर प्रशासन तथा सरकार द्वारा नियम बनाए जा रहे हैं. लेकिन अभी भी विस्थापित लोगों को चिंता का विषय सता रहा है. यदि जोशीमठ की दरारें कम नहीं हुई तो बहुत जल्द ही वहां की पूरी जमीन धंस जाएगी. इससे उत्तराखंड क्षेत्र को काफी क्षति होगी.

 सरकार द्वारा लगातार इस भूस्खलन के कारणों की जांच की जा रही है और विभिन्न निगमों से इस पर जवाब मांगा जा रहा है. आपको बता दें कि पहाड़ी क्षेत्रों में रास्ते बनाने के लिए लगातार होने वाली खुदाई और विस्फोट के कारण इस तरह की समस्याएं ज्यादा बढ़ गई हैं. जोशीमठ के संबंध में हम आपको आगे निरंतर जानकारियां प्रदान करेंगे.

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