Doctors Retirement Age 2023: डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़कर हुई 65 वर्ष, जाने पूरी जानकारी

Doctors Retirement Age 2023: आज के इस लेख में हमारे सभी साथियों एक बार फिर से स्वागत है। आज की यह अपडेट आपके लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि आज की पोस्ट का जो विषय है वह उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित होने वाला है। इसके बारे में यह कहा जा रहा है कि यह 22 सालों में एक बड़ा अहम कदम है। जहां पर अब डॉक्टरों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष से 65 वर्ष तक कर दी गई है। आज किस पोस्ट में हम यह समझने की कोशिश करेंगे। कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अगर आप भी इस अपडेट को बिल्कुल गहराई से जानना और समझना चाहते हैं। तो हमारे इस लेख को ध्यान पूर्वक पूरा पढ़ें।

Doctors Retirement Age Latest Update

इस फैसले से राज्य के डॉक्टर को लंबे समय तक कार्य करने की अनुमति तो प्राप्त होगी। जिससे कि उनके अंडर काम कर रहे डॉक्टरों को उनके अनुभव सीखने का और इस फील्ड को गहराई से जानने का काफी लंबा समय भी प्राप्त होगा। जैसा कि आप सभी लोग जानते होंगे कि यूपी के मुख्यमंत्री श्री आदित्य योगी नाथ जी के द्वारा आयोजित की गई। कैबिनेट मीटिंग में इस बात को लेकर काफी चर्चा हुई। 

कि उत्तर प्रदेश राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्य कर रहे डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़कर 65 वर्ष तक की जानी चाहिए। इसके पीछे सरकार की जो मंशा है वह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है और उसे जानना भी जरूरी है। वह यह है कि काफी लंबे समय से अस्पतालों में कार्य कर रहे डॉक्टर अपने अनुभव बांटने का मौका हासिल होगा। जिससे कि उनके अंडर काम कर रहे डॉक्टर को यह समझने में आसानी होगी कि वह पेशेंट के साथ किस तरह से डील करें। 

Doctors Retirement Age

इस बात से तो आप भी एग्री करते ही होंगे। कि किसी एग्जामिनेशन को क्वालीफाई करना एक अलग बात है। और किसी डिपार्टमेंट या अस्पताल या किसी विभाग में जाकर काम करना वहां से अनुभव हासिल करना अपने आप में एक अलग बात है। इस अनुभव और काम करने की कला को किसी अनुभवी व्यक्ति के साथ रहकर ही सीखा जा सकता है।

राज्य के सरकारी अस्पतालों में सेवारत डाक्टरों पर इसका प्रभाव 

10 अक्टूबर 2023 को यूपी के मुख्यमंत्री के द्वारा डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु को 62 वर्ष से बढ़कर 65 वर्ष तक करने की घोषणा की गई। इससे इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है। कि कैबिनेट के द्वारा लिए गए इस निर्णय से लगभग 14000 से अधिक डॉक्टर पर इसका प्रभाव देखने में आएगा‌ हालांकि इसे वैकल्पिक तौर पर मंजूरी दी जा चुकी है। 

इसके अलावा हम आपको यह बता दें कि कैबिनेट की घोषणा में यह भी कहा गया कि यह निर्णय सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। यह जो तथ्य है उसे उसे भी यहां पर यह समझ जाना चाहिए कि इस सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाने के पीछे का उद्देश्य यह भी है क्योंकि राज्य में अनुभवी डॉक्टरों की काफी कमी है। इस निर्णय से एक तो उन्हें लंबे समय तक काम करने का मौका मिलेगा। साथ में वे स्वस्थ एक क्षेत्र में आने वाले डॉक्टर को सही दिशा दे सकेंगे।

कैबिनेट की डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर नई नीति तथा उस पर चर्चा

इस महत्वपूर्ण नीति के मुताबिक यह डॉक्टर पर निर्भर करेगा। कि वह चाहे तो 62 वर्ष की उम्र में अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। या फिर भी चाहे तो एक मेडिकल ऑफिसर, डायरेक्टर के पद पर रहकर अगले तीन साल के लिए कार्यरत रह सकते हैं। सके अलावा हम यहां पर यह बिंदु भी स्पष्ट कर दें कि यह सिर्फ उन्हें डॉक्टर के लिए है जो की लेवल एक से लेकर चार तक के पदों पर विराजमान हैं। उन्हीं की सेवानिवृत्ति आयु को 62 वर्ष से बढ़कर 65 वर्ष तक किया गया है।

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना की टिप्पणी पर एक नज़र 

इसके अलावा हम यहां पर इस बिंदु को भी स्पष्ट किए देते हैं। कि संवाददाताओं की जब कैबिनेट मिनिस्टर सुरेश खन्ना जी से बात हुई। तो उन्होंने इस पर अपनी टिप्पणी जाहिर करते हुए कहा कि जिला टीबी अधिकारी, जिला कुष्ठ रोगी अधिकारी और प्रशिक्षण केंद्रों के प्रमुख डॉक्टर 62 वर्ष की आयु में अपने प्रशासनिक पद पर बने नहीं रहेंगे।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार वे अपने दैनिक कार्यों को तो अंजाम दे सकते हैं। इस निर्णय के समक्ष में यह कहा जा रहा है कि 14000 डॉक्टर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी प्रकार विशेषज्ञों ने अपने मत को‌ जहीर करते हुए कहा कि जिस तरह से प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर की रिटायरमेंट की गति तेज हो रही है। उसे आंकड़ों से इस बात का सीधा अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब करीब दो दर्जन डॉक्टर रिटायर्ड होते रहेंगे। जबकि जिस गति से डॉक्टरों की भर्तियां की जा रही है, वह इसका दो तिहाई भी नहीं है। यह काफी संगीण और गंभीर मामला है। जिस पर विचार विमर्श किया जाना अत्यंत जरूरी है।

Former Doctor की निर्णय को लेकर जारी स्टेटमेंट

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पूर्व डॉक्टर ने अपने कथन को व्यक्त करते हुए कहा है कि कई सेवारत डॉक्टर जो प्रशासनिक पदों पर विराजमान है। वे अपने महंगाई भत्ते के बढ़ने के लालच में आकर इन पदों पर बने रहना चाहते हैं। लेकिन वह जान ले कि हमें इस तरह के डॉक्टरों की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। हमें ऐसे डॉक्टरों की जरूरत है जो मरीज की देखभाल कर उनकी समस्याओं का निवारण कर सकें। और जिस तरह का एक डॉक्टर और मरीज के बीच में संबंध होता है उसे संबंध को कायम रख सकें। और जो शपथ उन्हें डॉक्टर के पद पर विराजमान होने से पहले दिलाई जाती है। वे उस की गरिमा को भी बनाए रखें। हमें ऐसे डॉक्टर नहीं चाहिए जो सिर्फ मोका का फायदा उठाना जानते हैं। और अपने कर्तव्य से कर्तव्य से मुंह चुराना जानते हो।

NITMEGHALAYA

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